मंथन- A Review

सफलता उसके पास आती है, जो साहस के साथ कार्य करते हैं। लेकिन जो परिणामों पर विचार करके ही भयभीत रहते हैं उनके पास कम आती है।

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आशा का दामन

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आशा का दामन

चाहत से चमत्कार भी होते हैं
शिद्धत से चाह कर तो देखो ज़रा
हो जाएगी कबूल हर दुआ
उठा कर हाथों को देखो ज़रा|

हर तरफ हो चाहे वीरानी
नज़र न आये गुलशन कहीं
खिल जाएँगें मोहब्बत के फूल
प्यार से सींच कर तो देखो ज़रा|

गर लगे कभी दुनिया बेरंग सी
घेरे हो मन को घोर निराशा
हो घना अँधेरा तो क्या हुआ
दीपक एक जला कर तो देखो ज़रा|

कौन भला है कौन बुरा
है वफा क्या, क्या बेवफाई
गैरों पर तोहमत लगाने से पहले
आईने में खुद को देखो ज़रा|

चमकाना हो भाग्य को तो
ढूँढ लाओ एक नयी रोशनी
बदल जाएगी बुरी तक़दीर भी
आशा का दामन थाम कर देखो ज़रा|

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
October 14, 2013

एक और बधाई आपको

    ushataneja के द्वारा
    October 14, 2013

    योगी जी, एक और बधाई कौन सी?

    ushataneja के द्वारा
    October 14, 2013

    जी, ज़रूर पढूंगी | धन्यवाद!

yogi sarswat के द्वारा
October 11, 2013

कौन भला है कौन बुरा है वफा क्या, क्या बेवफाई गैरों पर तोहमत लगाने से पहले आईने में खुद को देखो ज़रा| चमकाना हो भाग्य को तो ढूँढ लाओ एक नयी रोशनी बदल जाएगी बुरी तक़दीर भी आशा का दामन थाम कर देखो ज़रा| सुन्दर पंक्तियाँ उषा जी

    ushataneja के द्वारा
    October 11, 2013

    हार्दिक शुक्रिया योगी सारस्वत जी!

Bhagwan Babu 'Shajar' के द्वारा
October 11, 2013

बहुत सुन्दर बात बताई आपने अपने कविता के माध्यम से….

    ushataneja के द्वारा
    October 11, 2013

    भगवान् बाबु जी, बहुत बहुत शुक्रिया आपका!

bdsingh के द्वारा
October 10, 2013

आशा का दामन थाम कर तो देखो।  बहुत सुन्दर कविता।

    ushataneja के द्वारा
    October 10, 2013

    bdsingh जी, प्रोत्साहन के लिए शुक्रिया!

sanjay kumar garg के द्वारा
October 10, 2013

sundar bhaav puran kavita, badhaaee!

    ushataneja के द्वारा
    October 10, 2013

    badhaai ke liye hardik shukriya Sanjay ji!

sanjay kumar garg के द्वारा
October 10, 2013

अच्छी भाव पूरण कविता, बधाई!

    ushataneja के द्वारा
    October 10, 2013

    संजय कुमार जी, तहे दिल से आभार!

anshugupta के द्वारा
October 8, 2013

सुन्दर भावपूर्ण कविता……………

    ushataneja के द्वारा
    October 8, 2013

    प्रोत्साहन के लिए शुक्रिया अंशु जी!

Rajesh Dubey के द्वारा
October 8, 2013

हौसला बढाती कविता के लिए वधाई. दुसरे के दोष देखने के पहले अपने को देखना चाहिए.

    ushataneja के द्वारा
    October 8, 2013

    जिंदगी में शांत, संतुष्ट एवं खुश रहने का अचूक मन्त्र है| धन्यवाद आदरणीय राजेश दुबे जी!


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