मंथन- A Review

सफलता उसके पास आती है, जो साहस के साथ कार्य करते हैं। लेकिन जो परिणामों पर विचार करके ही भयभीत रहते हैं उनके पास कम आती है।

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"नव परिवर्तनों के दौर में हिंदी ब्लॉगिंग" Contest

Posted On: 5 Sep, 2013 Contest में

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“नव परिवर्तनों के दौर में हिंदी ब्लॉगिंग” Jagran Contest

नव परिवर्तनों का दौर तकनीकी विकास का दौर है इन परिवर्तनों में तकनीकी विकास इतनी तेज़ी से हो रहा है कि जब तक किसी एक उपभोक्ता वस्तु की जानकारी आम होती है तब तक दूसरी उससे अधिक उन्नत रूप में तैयार हो जाती है| युग पुरुष अमिताभ बच्चन जी ने एक बार अपने ब्लॉग में लिखा था कि जब तक एक स्मार्ट फ़ोन के सभी फीचर्स और उन्हें प्रयोग करने की विधि समझ में आती है तब तक नया स्मार्ट फ़ोन नए फीचर्स के साथ बाज़ार में आ जाता है|

ऐसे में यदि हिंदी ब्लॉगिंग की बात की जाये तो ऐसा लगता है जैसे पत्थरों से भरे तालाब में कंकड़ फैंक कर लहरों के उठने का मज़ा लेने की उम्मीद की जाये| परन्तु, यदि हम इतिहास पर नज़र डालें तो कोई भी क्रांति लाने में कलम से बड़ा शस्त्र कोई नहीं है और कलम किसी भाषा की मोहताज़ नहीं| अगर कलम में दम है तो वह सुप्त-प्रायः समाज या देश के भावो में प्रचंड वेग उत्पन्न कर सकती है|

पर, थोडा सा असहज तब लगता है जब तकनीकी विकास के माध्यम से होते हुए अपनी बात तुरंत विश्व-पटल के सामने रखनी हो|

नव तकनीक के क्षेत्र में द्रुत गति से विकासशील ब्लॉगिंग प्रथा शुरू में तो अंग्रेजी की बंधक थी क्योंकि कंप्यूटर तकनीक का विकास उस देश में हुआ जो केवल अंग्रेजी भाषा ही जानते थे| लेकिन हमारे लिये गर्व की बात है कि उनकी तकनीक का विकास हिंदुस्तान में अधिकतम हुआ और हिंदी भाषा कंप्यूटर तकनीक में अपना वर्चस्व बनाने में सफल रही|

ब्लॉगिंग एक ऐसी विधा है जिसमें न केवल स्थापित साहित्यकार अपितु एक आम आदमी भी अपनी बात ब्लॉग के ज़रिये दुनिया के सामने रख सकता है और इसका अर्थ केवल अपने मन की कहना ही नहीं बल्कि दूसरे लोगों तक उस बात को पहुँचाना  भी है| यह तभी संभव हो सकता है जब सम्प्रेषण का माध्यम सहज व सरल हो|

कोई भी ब्लॉग पाठकों को तभी आकर्षित कर सकता है जब पाठक को उसे पढने और समझने में अधिक माथापच्ची न करनी पड़े| वैसे भी अंतरजाल पर व्यक्तिगत अभिव्यक्तियों की बाढ़ सी आई रहती है और दिन पर दिन उसका बहाव और तेज़ होता जा रहा है| दूसरी तरफ, लोगो के पास समायाभाव होता है| किसी की कही बात को जानने या समझने के लिए वही ब्लॉग सफल हो सकता है जिसकी भाषा सर्वव्यापक हो, सहज हो, सरल हो, प्रवाहपूर्ण हो| भाषा ही विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है| हिंदुस्तान की सभ्यता व संस्कृति निसंदेह अद्वितीय है तथा पूरे विश्व में अनुपम है| हिंदुस्तान की राष्ट्रभाषा जानने वाला व हिंदी भाषा के प्रति उच्च सोच रखने वाला व्यक्ति ब्लॉगिंग के ज़रिये अधिकतम लोगों तक अपनी बात पहुँचा सकता है| बस, दम होना चाहिए उसके भावो में, विचारों में, शब्दों के चयन में व शिल्प में|

उषा तनेजा ‘उत्सव’



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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
October 12, 2013

आदरणीय ushataneja जी “ब्लॉग मित्र” बनने पर आपको बहुत-बहुत बधाई.

    ushataneja के द्वारा
    October 14, 2013

    आदरणीय सद्गुरु जी, आपके इस स्नेह के लिए बहुत बहुत धन्यवाद|

ashokkumardubey के द्वारा
September 21, 2013

ठीक कहा आपने किसी की कही गयी बात को अच्छी तरह समझने के लिए आम प्रचलित भाषा यानी हिंदी का इस्तेमाल किया जाये तो वह जन जन तक पहुच सकती है और तभी आपका कहना सार्थक होता है जब उसको ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ें और समझ सकें और निस्संदेह अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी की पहुँच अपने देश के ज्यादातर आबादी तक है केवल दक्षिण भारत के कुछ प्रान्त हिंदी को समझने और स्वीकारने में अभी पीछे हैं वर्ना अन्य प्रान्त के लोग हिंदी अच्छी तरह बोलते समझते और पढ़ते हैं. एक अर्थपूर्ण आलेख लिखने के लिए आपको बधाई

    ushataneja के द्वारा
    September 24, 2013

    आदरणीय ashokkumardubey जी, लेख को पूरा पढ़कर प्रोत्साहन देने के लिए तहे दिल से आभार ।

aman kumar के द्वारा
September 10, 2013

ब्लॉगिंग के ज़रिये अधिकतम लोगों तक अपनी बात पहुँचा सकता है| बस, दम होना चाहिए उसके भावो में, विचारों में, शब्दों के चयन में व शिल्प में| और भावनायो मे भी …….. सुंदर रचना !

    ushataneja के द्वारा
    September 10, 2013

    प्रोत्साहन के लिए हार्दिक शुक्रिया अमन कुमार जी|

anamika के द्वारा
September 9, 2013

बहुत सुन्दर आलेख तैयार किया है आपने ……..उत्तम

    ushataneja के द्वारा
    September 9, 2013

    आदरणीय अनामिका जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।

bhanuprakashsharma के द्वारा
September 8, 2013

हिंदी का पहले भी प्रभाव रहा और आज भी है व भविष्य में भी रहेगा। सुंदर आलेख बधाई। 

    ushataneja के द्वारा
    September 9, 2013

    Respected bhanuprakashsharma ji, thanks for visiting this blog and the comment. Yes, you are right. हिंदी भाषा का वर्चस्व सदा बढ़ता ही रहेगा ।

suryaprakashtiwadi के द्वारा
September 8, 2013

हकीकत को बया करता लेख,शुभकामनाये

    ushataneja के द्वारा
    September 8, 2013

    सादर आभार suryaprakashtiwadi जी, प्रोत्साहन के लिए|

jlsingh के द्वारा
September 8, 2013

भगवन बाबु के विचारों से सहमत. आदरणीया उषा सचमुच आज तीव्र गति से विकास हो रहा है और हमें यह अवसर प्राप्त हुआ है कि हम सबको एक दुसरे के विचार जानसमझ सकें और हिंदी की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है!

    ushataneja के द्वारा
    September 8, 2013

    आदरणीय jlsingh जी, धन्यवाद| जी हाँ, हिंदी ही ऐसी भाषा है जिसमें हम अपने मन के कोने से कोई बात कह सकते हैं व सुनकर स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं|

Bhagwan Babu के द्वारा
September 7, 2013

आपके लेख की अंतिम कड़ी बहुत महत्वपूर्ण है… बधाई..

    ushataneja के द्वारा
    September 8, 2013

    शुक्रिया भगवान बाबू जी ।


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